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हयग्रीव जयंती

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कौतूहल से भर जाता हूँ कि श्रावण पूर्णिमा के रोज़ क्या क्या नहीं होता? श्रावणी, रक्षाबंधन व विश्व संस्कृत दिवस के साथ साथ हयग्रीव जयंती भी होती है। ऐसे में यदि विष्णु के हयग्रीव अवतार के साथ-साथ गिटार के तारों की सुधि न आई, तो संस्कृत का विद्यार्थी कैसा? और फिर इन सुधियों में, गिटार के तारों का चढ़ान न किया, तो क्या किया? तो साहिबान, मेरी शब्दों की दुनिया के दोस्तो, ये बड़े ही प्राचीन काल की बात है। घोड़े के सामान ग्रीवा और मुखाकृति का एक दैत्य हुआ। उसका नाम था : “हयग्रीव”। उसने आदिशक्ति की उपासना से अमृत्व का वरदान प्राप्त करने के प्रयत्न किए। किन्तु आदिशक्ति ने ऐसा वरदान देने से इनकार कर दिया। वैसी स्थिति में, हयग्रीव ने कहा : “माते! ऐसा वरदान दीजिए कि मेरी मृत्यु हयग्रीव के ही हाथों हो!” -- इस वरदान को प्राप्त कर हयग्रीव को ऐसा लगता था कि वो स्वयं तो स्वयं को मारेगा नहीं। अतः अब वो अमर हो चुका है। फिर एक रोज़, श्रीहरि विष्णु ने अपनी योगमाया को निमंत्रण दिया। और "हयग्रीव" जैसा रूप लेकर "हयग्रीव" का वध किया! पूरी कहानी का रसरंग इस तथ्य में है कि उन्होंने "हयग्रीव...

विश्व संस्कृत दिवस

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[ चित्र : प्राच्य तिब्बत की संस्कृत प्रार्थना ] रक्षाबंधन के ही रोज़, एक और दिवस होता है! और वो है : “विश्व संस्कृत दिवस”। वही संस्कृत, जो ब्राह्मी लिपि की एक सारगर्भित भाषा है, जो व्यास-वाल्मीकि-कालिदास की त्रयी द्वारा सेवित है, जो पाणिनि-कात्यायन-पतंजलि जैसे प्रेमियों की यशस्वी प्रेमिका है, जो दो करोड़ शब्दों की समृद्ध भाषा है, अपने निकटतम प्रतिद्वंदी से कई गुणा आगे! श्रावण पूर्णिमा का दिवस उसी संस्कृत का विश्वस्तरीय प्रतीक दिवस है। विश्वस्तर पर संस्कृत का “स्टार” अगर किसी को कहा जाए तो निश्चित रूप से वे “पाणिनि” होंगे। “अ मंथली ऑफ़ इंडोलॉजिकल बाइब्लियोग्राफ़ी” के अप्रैल उन्नीस सौ तैंतीस के अंक में “पाणिनि” को “फ़र्स्ट सॉफ़्टवेयर मैन विदआउट हार्डवेयर” कह कर संबोधित किया गया था। इस लेख का मुख्य शीर्षक था : “संस्कृत सॉफ़्टवेयर फ़ॉर फ़्यूचर हार्डवेयर”। “पाणिनि” ने संस्कृत व्याकरण पर एक ग्रंथ लिखा, अष्टाध्यायी नाम से। उस ग्रंथ के श्लोक “उपजाति” छंद से आद्यांत निबद्ध हैं। उनके बाद इस छंद का प्रयोग केवल और केवल शृंगार रस के आलम्बन उदात्तनायक-नायिकाओं के रूप सौंदर्य व वसंत आदि ऋतुओं के वर्ण...